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Virendra shrivastava is a veteran journlist and freelance writer. He writes on topics that directly relate to life and create waves in heart. Besides penning his blog at pressnote.in and managing his software company, he also pend poetry at times. Shayarana is pround to publish his work.

आओ चलें लहर के पार

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Let's go across!

आओ चलें. फिर उदास सरिता सजन आओ चलें लहर के पार।

उछल – उछल बह रहा नदी – जल दो फूलों से मर्यादित।

ज्यों आवेश सपन का भाग्य दिवारों से बाधित।

फिर उजास में तम सजन आओं चलें चाँद के पार।

Let's go across!

भरी – भरी बदली मन की बरस न पायी खुलकर।

रह गई संवेदनाएँ हृदय – सिंधु में धुलकर ।

फिर टूट गया दर्पण सजन आओं चलें बिंब के पार।

स्व – पर का भेद बढा सजन आओं चलें खुदी के पार ।।

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